13 जुलाई 2013 - 19:30
राजनीतिक क़ैदियों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार

बहरैन के मानवाधिकार संगठन नें बहरैन की जेलों में क़ैदियों को दिये जाने वाले शिकंजों के फ़ोटो जारी कर के देश में क़ैदियों पर होने वाले व्यवहार से पर्दा उठाया है।

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार बहरैन के मानवाधिकार संगठन नें बहरैन की जेलों में क़ैदियों को दिये जाने वाले शिकंजों के फ़ोटो जारी कर के देश में क़ैदियों पर होने वाले व्यवहार से पर्दा उठाया है।इस संगठन नें बताया कि पिछले दिन एक महिला समेत नौ क़ैदियों को अदालत में पेश किया गया जिन्हें जेल में बहुत ही कठोर सज़ाएं दी गईं थीं। बहरैन के क़ौमी संगठन अल वफ़ाक़ नें एक बयान जारी कर के आले ख़लीफ़ा की तरफ़ से क़ैदियों पर किये जाने वाले ज़ुल्मों की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा है कि आले ख़लीफ़ा की जेलों में क़ैदियों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है यहाँ तक कि महिलाओं को भी नहीं माफ़ किया जाता है और उन्हें सज़ा दिये जाने के साथ साथ बेपरदा किया जाता है। बहरैन क्रांति से जुड़ी एक महिला रेहाना मूसा जिन्हें 14 फ़रवरी को गिरफ़्तार किया गया था, को पिछले दिन अदालत में पेश किया गया। रेहाना मूसी नें बताया कि जेल में आले ख़लीफ़ा के गुर्गे उनके कपड़े उतार कर उन्हें सज़ाएं देते थे।अदालत में पेश किये गए विभिन्न क़ैदियों नें अपने कपड़े हटाकर जेल में दी गई सज़ा से हुए ज़ख़्मों को दिखाया।सूचनाओं के आधार पर रिपोटर्स को दालत में घुसनें की इजाज़त नहीं दी जाती है। जमीअते अलविफ़ाक़ नें अपने बयान में आगे कहा कि रेहाना मूसा और विभिन्न लोगों के बयान इस बात को साबित करते हैं कि बहरैन की सरकार किसी भी इस्लामी और इन्सानी क़ानून को नहीं मानती है और बहरैन में होने वाले सभी अपराधों में यहाँ के पदाधिकारी शामिल हैं।उधर बहरैन के विभिन्न क्षेत्रों में हज़ारों लोगों नें क़ैदियों के साथ किये गये अत्याचारों के विरोध में प्रदर्शन किये और उनकी रिहाई की मांग की। बहरैन में आले ख़लीफ़ा की काल कोठरी से रिहा होने वाली महिला नें कहा कि उनके साथ बहुत बुरा और वहशियाना व्यवहार किया गया था।